1 APRIL: आज से कई नियमों में होने जा रहे बदलाव

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1 APRIL: आज से कई नियमों में होने जा रहे बदलाव, जानें आप पर क्या पड़ेगा असर
अलग-अलग क्षेत्रों में कई बदलाव होने वाले हैं। इनमें से ज्यादातर तब्दीली आपको राहत देने वाली हैं। पांच लाख तक की आमदनी पर टैक्स में छूट मिलने से लाखों कर्मचारियों को फायदा मिलने लगेगा। किफायती श्रेणी के घरों पर जीएसटी पांच से एक फीसदी होने से ये घर तीन से चार लाख तक सस्ते हो जाएंगे। इसी तरह बीमा, जीएसटी, ईपीएफ, पैन कार्ड, प्रॉपर्टी, जीएसटी, बैंक, ईपीएफ और निवेश में लोगों को सहूलियतें मिलने वाली हैं।

पांच लाख रुपये तक की आयवालों को कर नहीं देना होगा

अंतरिम बजट में की गई आयकर संबंधी घोषणाओं का फायदा एक अप्रैल से प्रभावी हो जाएगा। इसमें सबसे बड़ी राहत वेतनभोगियों को मिलेगी। नए वित्तीय वर्ष में पांच लाख तक सालाना आय अब करमुक्त होगी। हालांकि वार्षिक 2.5 लाख या वरिष्ठ नागरिकों के लिए 3 लाख से ज्यादा कमाने वालों को पहले की तरह आयकर रिटर्न फाइल करना होगा।

एक अप्रैल 2019 से गणना की जाने वाली सालाना आय यदि पांच लाख रुपये तक है और आप एक भी रुपये की टैक्स छूट का दावा नहीं करते हैं तो भी आपको कोई कर नहीं देना होगा। वहीं, अगर आप बचत और निवेश करते हैं तो टैक्स छूट का फायदा उठाकर सालाना 7.75 लाख रुपये तक की आय पर भी आपको कोई टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकतम 7.75 लाख रुपये तक की आय वाले लोग कर छूट की योजनाओं का फायदा उठाकर अपनी सालाना कर योग्य आय को पांच लाख रुपये तक ला सकते हैं । ऐसा करके वे आयकर देने से बच सकते हैं। आप एनपीएस, पीपीएफ, बच्चों की ट्यूशन फीस पर टैक्स छूट पा सकते हैं। किसान विकास पत्र, एफडी, एनएससी, सीनियर सिटीजन स्कीम में किया गया निवेश भी कर छूट का दायरा बढ़ाया जा सकता है। एफडी पर सालाना 40 हजार रुपये तक के रिटर्न पर टैक्स नहीं लगेगा।

7.75 लाख रुपये की आय पर कैसे मिलेगी छूट

2019-20 के लिए सबसे पहले आप 50,000 रुपये की मानक कटौती का दावा कर सकते हैं, जो पहले 40 हजार रुपये थी।इससे आपकी करयोग्य आय में 50 हजार रुपये की कमी अपनेआप हो जाएगी और आपकी कर योग्य आय घटकर 7.25 लाख रुपये रह जाएगी।

आयकर की धारा 80सी के तहत आप 1.5 लाख रुपये का निवेश पीपीएफ, एनएससी, किसान विकास पत्र, ईएलएसएस जैसी बचत योजनाओं में कर सकते हैं। बच्चों की ट्यूशन फीस पर 1.5लाख रुपये कर छूट पाई जा सकती है। अगर 1.5 लाख की टैक्स छूट को घटा दें तो करयोग्य आय घटकर 5.75 लाख रह जाएगी।
अगर आपने व्यक्तिगत या अपने परिवार के लिए मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी ली है तो 25 हजार रुपये तक की कर छूट धारा 80डी के तहत पाई जा सकती है। अगर आप अपने माता-पिता के लिए मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम ले रखा है तो इस पर 15 हजार रुपये की अतिरिक्त छूट का लाभ आपको मिल सकता है। इससे आपकी सालाना करयोग्य आय पांच लाख रुपये से नीचे आ जाएगी और आप पूरी तरह टैक्स छूट के हकदार हो जाएंगे।

आप धारा 80सीसीडी (1बी) के तहत नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) में 50 हजार रुपये के अतिरिक्त निवेश पर टैक्स छूट पा सकते हैं। इसके बाद आपकी सालाना करयोग्य आय घटकर 5.25लाख रुपये पहुंच जाएगी।

सरकार ने इसके अलावा एफडी पर सालाना 40 हजार रुपये तक का रिटर्न भी टैक्स फ्री कर दिया है, इससे भी वेतनभोगियों, खासकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को फायदा होगा। पहले दस हजार रुपये तक का ब्याज ही करमुक्त था, जिससे लघु बचत योजनाओं में निवेश करना ज्यादा फायदेमंद सौदा नहीं था।

छूट पाने को रिटर्न भरना होगा

1 अप्रैल से कर छूट लाभ पाने के लिए आईटीआर दाखिल करना जरूरी होगा। सरकार ने ढाई लाख, पांच लाख, दस लाख या 20 लाख रुपये की आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। अगर आपकी सालाना आय 2.5 लाख से अधिक है तो आईटीआर अनिवार्य होगा और आईटीआर नहीं भरने पर आपको टैक्स वसूली का नोटिस आ सकता है। आईटीआर दाखिल करने में देरी पर हजार रुपये से दस हजार रुपये तक का जुर्माना भी हो सकता है।

नई परियोजनाओं के घर काफी सस्ते हो जाएंगे

केंद्र सरकार ने निर्माणाधीन घरों और किफायती आवास क्षेत्र की नई परियोजनाओं के लिए जीएसटी में भारी कमी की है। यह एक अप्रैल से लागू हो जाएगी। यानी,एक अप्रैल से पंजीकृत होने वाली परियोजनाओं पर जीएसटी में राहत मिलेगी और घर सस्ते होंगे।
निर्माणाधीन परियोजनाओं पर जीएसटी 12 से घटाकर पांच फीसदी किया गया है।वहीं किफायती आवास क्षेत्र की परियोजनाओं पर टैक्स को आठ फीसदी से एक फीसदी पर लाया गया है। हालांकि नई दरों के साथ बिल्डरों को इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी कच्चे माल पर चुकाए गए टैक्स का रिफंड नहीं मिलेगा। यह देखने वाली बात होगी कि डेवलपर कितनी टैक्स में कितनी कमी लाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी में कमी से नए मकानों की कीमत में पांच से दस फीसदी की कमी आ सकती है।

जीएसटी परिषद का निर्णय बिल्डर और खरीदारों दोनों को राहत देने वाला है। इसने पुरानी कर व्यवस्था से नई स्लैब में जाने के ट्रांजीशन पीरियड को स्पष्ट कर दिया है। जीएसटी दरों में कमी से मकानों के सस्ते होने से ग्राहकों का घर खरीदने का भरोसा बढ़ेगा ।

घर-वाहन के कर्ज में मिल सकती है राहत

आरबीआई ने बैंकों से कर्ज की दरें तय करने के लिए बाहरी बेंचमार्क का इस्तेमाल करने को कह दिया है। फिलहाल यह आंतरिक बेंचमार्क के आधार पर होता है। इससे वाहन, घर और पर्सनल ऋण की दरों में बड़ा बदलाव आ सकता है।

क्या है व्यवस्था

’ फिलहाल बैंक जो कर्ज तय करता है वह अपनी जमा, उधारी की लागत के आधार पर करता है
’ रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों को कहा कि नए निर्र्देश का पालन सभी बैंक एक अप्रैल 2019 तक हर हाल में करें

क्या है बेंचमार्क

’ बेंचमार्क एक तरह का आधार दर है जिसमें बदलाव होने पर लोन की ब्याज दरों पर भी इसका असर देखने को मिलता है
’ रेपो दर में कटौती के बावजूद बैंक पर्याप्त राहत ग्राहकों को नहीं देते हैं, ऐसे में बदलाव जरूरी था।
’ 40 करोड़ ग्राहक वाले एसबीआई ने सबसे पहले इसकी घोषणा कर दी।

बीमा योजना खरीदना अब पहले से सस्ता हो जाएगा

जीवन बीमा खरीदना सोमवार से सस्ता होगा। बीमा कंपनियों और बीमा प्राधिकरण इसकी तैयारी कर चुका है। इसका 22 से 50 साल के लोगों को ज्यादा फायदा होगा।

ये बदलाव होंगे : मृत्यु दर के नए आंकड़ों का पालन करना कंपनियां एक अप्रैल से प्रारंभ कर देंगी। अभी तक कंपनियां 2008 के आंकड़ों का इस्तेमाल करती थीं। अब यह तब्दील होकर 2014 से हो जाएगा।

किनको नहीं मिलेगा लाभ : नए नियमों से अधिक उम्र वाले ग्राहकों को किसी तरह का लाभ नहीं मिल पाएगा। क्योंकि 82 वर्ष से लेकर 100 वर्ष तक मृत्यु दर सबसे अधिक है।

अगली ट्रेन छूटी तो आपका पूरा पैसा वापस

रेलवे एक अप्रैल से यात्रियों को नई सुविधा देने जा रहा है। एयरलाइंस की तरह रेलवे भी एक ही यात्रा के दौरान एक के बाद दूसरी ट्रेनों से सफर करने की स्थिति में अब संयुक्त पीएनआर जारी करेगा। यात्रियों को पहली ट्रेन लेट होने से अगली कनेक्टिंग ट्रेन के छूट जाने की सूरत में बिना किसी शुल्क के पूरा पैसा वापस हो जाएगा।

रिफंड आसान हो जाएगा

अब दो पीएनआर को लिंक करना आसान हो जाएगा। फिर चाहे आपने टिकट ऑनलाइन बुक हो या काउंटर पर। ऐसा करने से पैसेंजर को पहले के मुकाबले आसानी से रिफंड मिल जाएगा।

टीटीई के पास सीट का अपडेट

यह डिवाइस रेलवे सर्वर से कनेक्ट होगी। इसके जरिए टिकट कैंसलेशन का हर अपडेट टीटीआई को मिलता रहेगा। इस तरह कोई टिकट कैंसल होने पर टीटीई र्वेंटग लिस्ट के हिसाब से बर्थ दे देगा।