बीएमडब्ल्यू का तकनीकी कायाकल्प: सुरक्षित मैनुअल गियरबॉक्स और एआई का समावेश
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बीएमडब्ल्यू का तकनीकी कायाकल्प: सुरक्षित मैनुअल गियरबॉक्स और एआई का समावेश

जर्मन वाहन निर्माता कंपनी बीएमडब्ल्यू ने अपनी भविष्य की योजनाओं को लेकर एक दिलचस्प रणनीति अपनाई है, जो पारंपरिक ड्राइविंग के शौकीनों और आधुनिक तकनीक प्रेमियों दोनों को लुभाने के लिए तैयार है। जहां एक ओर ऑडी और मर्सिडीज जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियां पूरी तरह से ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन की ओर बढ़ रही हैं, वहीं बीएमडब्ल्यू ने मैनुअल गियरबॉक्स को न केवल जीवित रखने, बल्कि उसे और अधिक सुरक्षित बनाने का फैसला किया है। इसके साथ ही, कंपनी अपने डिजिटल इंटरफेस में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए अमेज़न के साथ भी हाथ मिला रही है।

मैनुअल ट्रांसमिशन में नई सुरक्षा प्रणाली

दहन इंजन (combustion engine) वाली कारों में गियरबॉक्स सबसे संवेदनशील और महंगे घटकों में से एक होता है। अक्सर तेज रफ्तार में गाड़ी चलाते समय ड्राइवरों से गियर बदलने में चूक हो जाती है, जैसे चौथे गियर की जगह गलती से दूसरे गियर में शिफ्ट कर देना। इस तरह की गलती से इंजन के आरपीएम (RPM) अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं, जिससे इंजन या गियरबॉक्स को भारी नुकसान पहुंचता है और इसकी मरम्मत में लाखों रुपये का खर्च आ सकता है।

इस समस्या के समाधान के लिए बीएमडब्ल्यू ने जर्मन पेटेंट और ट्रेडमार्क कार्यालय में एक नई तकनीक का पेटेंट कराया है। यह तकनीक विशेष रूप से उन ड्राइवरों के लिए है जो मैनुअल ट्रांसमिशन का आनंद लेना चाहते हैं लेकिन मानवीय भूलों से बचना भी चाहते हैं। कंपनी द्वारा विकसित यह सिस्टम एक अवरोधक तंत्र (blocking mechanism) के रूप में कार्य करेगा। कारबज़ की रिपोर्ट के अनुसार, बीएमडब्ल्यू अपनी कारों में अतिरिक्त सेंसर लगाएगी जो यह पहचानेंगे कि ड्राइवर कौन सा गियर लगाने की कोशिश कर रहा है और उस समय इंजन के क्रैंकशाफ्ट की गति क्या है।

स्मार्ट सेंसर और भविष्य के मॉडल

यह प्रणाली काफी बुद्धिमानी से काम करेगी। यदि वाहन को लगता है कि ड्राइवर ऐसा गियर बदलने जा रहा है जिससे इंजन को नुकसान हो सकता है, तो यह सिस्टम तुरंत सक्रिय हो जाएगा और गियर लीवर को उस गियर में जाने से रोक देगा। यह सुरक्षा कवच विशेष रूप से बीएमडब्ल्यू की आगामी पीढ़ियों, जैसे कि एम2, एम3 और एम4 मॉडलों में देखने को मिल सकता है। बीएमडब्ल्यू जेड4 के उत्पादन के बाद केवल इन्हीं मॉडलों में मैनुअल ट्रांसमिशन का विकल्प मिलने की पुष्टि हुई है। हालांकि कंपनी अपने बेड़े के विद्युतीकरण से नहीं बच सकती, लेकिन उनका स्पष्ट मानना है कि मैनुअल गियरबॉक्स का अस्तित्व अभी खत्म नहीं होने वाला है।

डिजिटल अनुभव में बड़ी छलांग: एलेक्सा प्लस

जहां एक तरफ कंपनी मैकेनिकल इंजीनियरिंग में सुधार कर रही है, वहीं दूसरी तरफ 2026 तक कारों के अंदरूनी डिजिटल वातावरण को पूरी तरह बदलने की तैयारी भी चल रही है। बीएमडब्ल्यू ने घोषणा की है कि वह अपने ‘इंटेलिजेंट पर्सनल असिस्टेंट’ को अमेज़न के ‘एलेक्सा प्लस’ (Alexa+) के साथ अपग्रेड करेगी। इस नई तकनीक का उद्देश्य कार के साथ बातचीत को महज आदेश देने तक सीमित न रखकर, उसे एक सामान्य मानवीय चर्चा जैसा बनाना है।

इस नई व्यवस्था की शुरुआत बीएमडब्ल्यू iX3 मॉडल से होगी और इसे पहली बार सीईएस (CES) 2026 में दुनिया के सामने पेश किया जाएगा। इस तकनीक के केंद्र में लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) और जेनरेटिव एआई का उपयोग किया गया है, जो जटिल वाक्यों को समझने और संदर्भ बनाए रखने में सक्षम है। अब ड्राइवरों को रटे-रटाए कमांड्स का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं होगी।

संदर्भ समझने की क्षमता और नेविगेशन

इस उन्नत असिस्टेंट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह एक ही वाक्य में वाहन से जुड़े कार्यों और सामान्य ज्ञान के प्रश्नों को समझ सकेगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई उपयोगकर्ता पूछता है कि “दुनिया की सबसे प्रसिद्ध पेंटिंग कौन सी है और मैं उसे कहां देख सकता हूं?”, तो असिस्टेंट न केवल यह बताएगा कि वह लियोनार्दो दा विंची की ‘मोना लिसा’ है जो लौवर संग्रहालय में है, बल्कि वह नेविगेशन को भी तैयार रखेगा। इसके बाद उपयोगकर्ता केवल इतना कह सकता है, “मुझे वहां ले चलो,” और सिस्टम बिना किसी दोहराव के संदर्भ को समझते हुए रूट सेट कर देगा।

अमेज़न के एलेक्सा और इको के उपाध्यक्ष डैनियल राउस ने इसे नए ‘एलेक्सा कस्टम असिस्टेंट’ का पहला बड़ा कार्यान्वयन बताया है। यह नया सिस्टम बीएमडब्ल्यू के पैनोरमिक आईड्राइव (Panoramic iDrive) और ऑपरेटिंग सिस्टम एक्स (Operating System X) के साथ मिलकर काम करेगा। शुरुआत में इसे जर्मनी और अमेरिका के बाजारों में अंग्रेजी और जर्मन भाषाओं में लॉन्च किया जाएगा, जिसके बाद इसे धीरे-धीरे अन्य देशों में विस्तारित किया जाएगा। बीएमडब्ल्यू का यह कदम स्पष्ट करता है कि भविष्य की कारें केवल परिवहन का साधन नहीं होंगी, बल्कि वे उपयोगकर्ता के डिजिटल इकोसिस्टम का एक अभिन्न और समझदार हिस्सा बन जाएंगी।